‘नोटबुक’ फिल्म रेव्यु
सलमान खान, जिनको इंडस्ट्री में सभी लोग भाईजान के नाम से जानते है| एक बार फिर से नया चेहरा लांच करने जा रहे है,जिसका नाम है ज़हीर इक़बाल| ज़हीर इक़बाल, सलमान के बचपन के दोस्त इक़बाल के बेटे है| जिस फिल्म के ज़रिये ज़हीर को लांच किया जा रहा है, उस फिल्म का नाम “नोटबुक” है| जिसमे ज़हीर के ऑपोज़िट है, सलमान के ख़ास दोस्त मोहनीश बहल की बेटी प्रनूतन बहल| फिल्म को डायरेक्ट किया है “नितिन कक्कड़” ने| नितिन इससे पहले “फिल्मिस्तान” और “मित्रो” जैसी फिल्मे डायरेक्ट कर चुके है| “फिल्मिस्तान” को 60 वें नेशनल अवार्ड्स में बेस्ट फीचर फिल्म का अवार्ड मिल चुका है|

कश्मीर की पृस्ठभूमि में फिल्म ‘नोटबुक’ एक लव स्टोरी है, जो अलग ढंग की इसलिए है क्यूकी हीरो-हीरोइन फिल्म के बिलकुल अंतत से कुछ समय पहले, आखिरी मिनट में पहली बार आमने-सामने होते हैं। वे बिना एक-दूसरे को देखे और जाने ही प्रेम करने लगते हैं। एक नोटबुक उनके प्रेम का जरिया बनती है और इसी के सहारे कहानी को आगे बढ़ाया गया है।
कबीर (ज़हीर इकबाल) को बचपन में ही कश्मीर से किसी कारण के चलते भगा दिया जाता है। इस दर्द को लेकर वह सेना में भर्ती हो जाता है। एक घटना के कारण वो अपराध बोध हो जाता है और सेना की नौकरी छोड़ के कश्मीर स्थित एक स्कूल में टीचर बन जाता है।
यहां उसके हाथ एक नोटबुक लगती है, जो उसके पहले इस स्कूल में टीचर रही फिरदौस (प्रनूतन बहल) की है।
फिल्म की कहानी और स्क्रीनप्ले को थोड़ा कम पकाया गया है
कश्मीर की आबादी से काफी दूर झील में स्थित एक स्कूल वाली बात गले के नीचे नहीं उतरती है। शायद फिल्म खूबसूरत दिखे, इसलिए यह किया गया हो। इतनी सुनसान स्कूल में एक लेडी टीचर कैसे रह सकती है? जब वहां बिजली की कोई व्यवस्था ही नहीं है तो कबीर मोबाइल कैसे चला लेता है?
बहरहाल प्रनूतन के मुकाबले ज़हीर का अभिनय थोड़ा बेहतर है। फिल्म में पांच-छ: बच्चे दिखाए गए हैं जो अपनी मासूमियत से दिल जीत लेते हैं।

Writer, Storyteller, Dreamer

